PACH 20 : चुस्कियों के साथ अनोखा समां



मैं ज़्यादा कुछ नहीं बस एक प्याला हूँ , कॉफ़ी का प्याला CCD में लोग आते हैं और मुझमें किस्म किस्म की कॉफ़ी का आनंद लेते हैं घंटों कभी दोस्तों के साथ, कभी तन्हाई में और कभी अपने प्यार के साथ कुछ सूना सा था हम सभी का शनिवार का दिन कुछ खुसर पुसर शुरू हुई और देखा चश्मा पहने एक लड़का आया भोला सा अगले दिन की महफ़िल के लिए जैसे ही वो बोला PACH , हम सभी में जश्न सा मना लोधी पर शीश तो लुफ्त ले ही चुकी थी अर्से पहले, अब हमारी बारी थी, बहुत सुना था इसके बारे में


उस रात हमने जश्न मनाया अगले दिन की ख़ुशी में

इतवार को सब लग गए अपनी अपनी बारी में

कविता, दर्द, ख़ुशी, आँसू सब बाँटने की बारी

ऐसी जगह जहाँ दोस्तों की जमघट में मायूसी हारी

एक ख़्वाबों की दुनिया में चल पड़ा मैं

जहाँ प्यार ही सब कुछ है, यादों के सहारे प्यार को जीतते देखा मैंने 

और फिर उसी प्यार को प्यार करते देखा मैंने


धुंध भरे चौराहे की तरफ चल पड़ा मैं कुछ यादों की तलाश में

हर आवाज़ में ढूँढा मैंने नये प्यार की कशिश को, चाहे वो बारिश थी, पानी या फिर चलती हवा ही सही

उम्मीद को आगे बढ़ते देखा है मैंने , डर और नफरत से खुद डरा भी और सहमे मेरे साथी भी 

खुशनुमा माहौल पसंद है सबको , ऐसा प्यारा माहौल नहीं देखा मैंने कभी लगा जैसे बस इनको सुनता ही जाऊँ

उनका नशा उतरता नहीं, उम्मीद खत्म होती नहीं

बिना कहे ही प्यार की बारिश में भीगा मैं

एक हल्का सा सुरूर भी है, थोड़ी कशिश भी है

उसको और चाहते जाने का अलग ही मज़ा भी है


प्यार और बाल का इज़हार भी है

माँ, बहन और ज़िन्दगी में औरत की कमी होने का दर्द भी है , उनके न होने पर तन्हाई की टीस भी है 

जिनके बारे में मैंने सुना था क्या वही लोग हैं यह ? 

पल में हॅसाते हैं, पल में रुलाते...

आज तूफ़ानो का मौसम है, जज़बातों की आँधी भी है

ज़िन्दगी की तेज़ आँधियों से लड़ती हौसलों की लौ भी है

कुछ रिश्ते भी हैं , मगर उनका कुछ नाम भी नहीं है 

अजनबी न होते हुए भी अजनबी है कोई

प्यार है या उसको यह जताने का एहसास है


आज एक का जन्मदिन भी है और उसमें कटता केक भी है

चेहरे पर चॉकलेट भी है और आँखों में ख़ुशी भी है 

एक मंदबुद्धि इंजीनियर भी है

उड़ने की चाह भी है, कुछ अलग करने का इरादा भी है

मगर दुनिया भी पंखों को काटने को तैयार खड़ी है

गाँव भी, है, रात भी है और उसकी ख़ामोशी में आवाज़ करते झींगुर भी है 

सोच है, यादें भी, चाँद की रौशनी भी और भैसें भी 

सुबह होते ही गाँव में शुरू होने वाली चहल पहल भी है और बच्चों का आना भी

                                 

समंदर के बीच में परदेस में भी अकेलापन है 

यह किस मिट्टी के बने हैं ? कोई बतलायेगा मुझे ? 

सिसक पड़ते आँसूं भी हैं किसी की याद में

उसको यह बताते हुए की प्यार तो तुझसे अभी भी है मुझे, इन यादों से तो पूछ एक बार

रो पड़ते हर दिल को देखा है मैंने , दिल के किसी कोने में छुपे दर्द को पिघलते शीशे की तरह बहते देखा है

एक लौंडा अश्लील भी है 

मगर उसके शब्दों से तो ऐसा नहीं लगता 

तवायफ के अंदर छुपी औरत को पहचानने की कला उसमें है

सिर्फ खिलौना नहीं, एक दिल को महसूस करने का ज़ज्बा भी है


शब्दों को जोड़, तोड़ कर कविता बना सकते हैं , मोतियों से भी खूबसूरत माला पिरो सकते हैं 

प्यार की याद में आधी रात को जाग कर लिखते देखा, किसी की कमी को महसूस करते देखा

खुद से भी बढ़ कर किसी को मानते देखा है , उसी इंसान को खुदा मानते देखा है

प्यार क्या ऐसा होता है ?

दुनिया हवस को प्यार का नाम देती है, मगर मैंने इन दीवानो में प्यार देखा है

एक लड़की को समाज से लड़ते देखा है 

अपनी माँ, भाई से अपने हिस्से का प्यार पाने की उम्मीद करते देखा है

पहले द्रौपदी और फिर काली बनते देखा है


किसी को माँ की कमी महसूस करते देखा है , उसकी बाहों में छुपे प्यार की कमी महसूस करते देखा है 

खाली कटोरी को देख कर दही चीनी याद करते देखा है

मैंने वहाँ सभी के ज़ज्बातों को बहते देखा है 

PACH को समय बनते देखा है , उसको रूप लेते देखा है

उसकी अपनी एक पहचान बनते देखा है 

समय PACH है या PACH समय, नहीं पता ...

ख़बरों से बेवजह का राई का पहाड़ बनते देखा है

                               


शहर तो बहुत से हैं, यह PACH शहर कौनसा है ? किस कोने में है ?

शायद यहाँ मौजूद हर किसी के दिल के कोने में है, रगो में बसा हुआ 

ठीक कहा था शीश ने, यह दीवानो की टोली अलग ही है

गाते हैं, हँसते हैं, मुस्कुराते हैं तो पता नहीं क्यूँ हम जैसों को भी अपना बना लेते हैं ..

इनको क्या पता की इनके जाने के बाद हम सभी ने इनके यहाँ होने का जश्न मनाया ..

उन 5.३० घंटों में पता नहीं कितनी यादें दे गए यह सब ?

इतने खुश तो हम कभी न थे, PACH के आने से पहले ..

एक बार फिर आना PLEASE ... :) 

PACH 20 : चुस्कियों के साथ अनोखा समां PACH 20 : चुस्कियों के साथ अनोखा समां Reviewed by Shwetabh Mathur on 12:17:00 PM Rating: 5

7 comments:

  1. As always your words and its magic...too good Shwetabh

    ReplyDelete
  2. बेहद सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  3. बेहद सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  4. delayed response, but as we say better late than never,PACH sukoon hai,,aur ye sabdon ka izhar kitna sundar aur adhbhut hai, i feel blessed to be a part.





    ReplyDelete
  5. delayed response, but as we say better late than never,PACH sukoon hai,,aur ye sabdon ka izhar kitna sundar aur adhbhut hai, i feel blessed to be a part.





    ReplyDelete
  6. kitna sundar kehte ho.
    i feel blessed to be a part of PACH

    ReplyDelete