PACH 22 : जश्न भी है और कवितायेँ भी



मैं Sattviko हूँ

हाँ वही स्वादिष्ट चटोरपने की जगह जहाँ लोग चटकारे ले कर मज़े से खाते हैं

इस इतवार वही पलटन आई पिछली बार जनपथ में कॉफ़ी पी कर

अरे भई PACH वाले हैं, खुद का पेट तो चटोरपने से भर लेते हैं और दूसरों का अपनी कविताओं से भर देते हैं

वही कवितायेँ जो कुछ शब्दों से बनती हैं मगर दिल के बहुत सारे जज़्बात एक साथ कह जाती हैं , प्यार की, दिल की , आपबीती भी है आईना है खुद का जिसमें दिखती है परछाई , आस्था के बनाये आईने की तरह - बिलकुल साफ़ 

देखी मैंने इस बार भूख पास से जिसमें दुनिया से लापरवाही है चने को देख कर

मुठ्ठी में ले कर खाते हुए भूख मिटने की ख़ुशी भी है, चाहे ऐसे ही खा लो या सत्तू बना लो, चाहो तो बो कर और उगा लो

फोटोग्राफर की खींची तस्वीरों में कैद जज़्बात भी देखे हैं 

आज के अनमोल पलों को बाद में सोने में बदलने की उम्मीद भी देखी है

मैंने हाथों की लकीरों में किसी के लिए बेशुमार प्यार भी देखा है


गुज़री यादों में रोज़ उसके साथ ज़िन्दगी बिताते देखा है

कुछ उसको लहरें और कुछ उसको साहिल बनते देखा है

अपनी पत्नी के लिए किसी में इतना प्यार देखा है 

ईश्वर को दुनिया से आज़ाद होते प्रकृति के साथ जुड़ते देखा है

फूल , पत्ती , झरने, नदी पर कविता लिखते भी देखा है

बिना कुछ कहे ही बहुत कुछ कह जाने की कला भी देखी है

गुलाब की पंखुड़ी पर सुबह की ठंडी ओस की तरह मासूम उस लड़की के हौंसले पर एक को अपने दिल के जज़्बातों को व्यक्त करते देखा है

सब कुछ सह कर भी मुस्कुराने वाली वो लड़की में ज़्यादा साहस है या उस लड़के में ज़्यादा समर्पण , यह नहीं पता मगर जो भी है वही PACH की खासियत 

छोटी चीज़ों की अहमियत भी देखी है 

वोट की, नोट की, कोट की... इन सबकी ज़रुरत भी महसूस की है

किसी के लिए इन सब की अहमियत महसूस की है


मैं कौन हूँ कह कर किसी को अपने कवि होने का किसी को एहसास कराते देखा है

ज़ुबा से नहीं , शब्दों और कलम से दिल की बात कहते देखा है

अपने आखिरी वक़्त में एक सिपाही को अपना क़र्ज़ पूरा करते देखा है 

अपनी माटी, अपने झंडे को याद कर अपनी ज़िन्दगी के पल फिर से याद 
करते देखा है

परिवार इंसानो से नहीं उसका, इन सब चीज़ों से बना है उसके लिए


विदेश से आये उस " मोहन भार्गव " की मुलाक़ात भी मैंने देखी है

उसको इनकी कविताओं में खोते भी देखा है

उन सबको स्तब्ध रह कर उसको सुनते देखा है, उनसे मिलने की ख़ुशी देखी है

साथ फोटो खिचवाने का जूनून भी देखा है

एक छोटे बच्चे को व्रत रखते देखा है शौक में

खूब सारे फल खाते देखा है और फिर ललचाती चीज़ो के आगे भगवान को सॉरी बोल व्रत तोड़ते भी देखा है

मैंने एक पगड़ी से बनते एक खालसा को देखा है

हर लड़ के पूरा होने के साथ उसे एक कदम अपनी पहचान की तरफ बढ़ते देखा है



मैंने 4 चैम्बर वाले दिल को बस लब डब कर काम करते देखा है 

इंसान की हरकतों के खामियाज़े से खुद को बचाते देखा है 

समोसे, सिगरेट की जगह खुद के लिए adrenaline मांगते देखा है

बुरी आदतों से किसी को भेजा प्रेम पत्र भी लिखा हुआ मैंने देखा है 

नींद की गोली से उसके लिए शोर में नींद लाते, सिगरेट को उसके इश्क़ में जलते देखा है 

शराब को उसके इंतज़ार में बोतल में रखे देखा है

दिल को टूटते देखा है, उम्मीद को हर पल उसकी ख़ुशी या मायूसी में देखा है 

आँसुओं को बहते देखा है , कागज़ के मुड़े हुए किनारे के बीच कुछ लिखने की कोशिश करते देखा है


मोटरसाइकिल पर हवा से बातें करते हुए, ज़िन्दगी को चुनौती देते हुए देखा है

एक 26 साल के शिशु को भी देखा है 

लड़कियों से इश्क़ करते हुए और माँ के आँचल में छुपे इसकी लापरवाह हरकतों को भी देखा है 

इसी शिशु को फिर कविताओं की फसल उगाते हुए भी देखा है 

उसी मासूम ओस वाली लड़की को अपने भूले हुए प्यार को खत लिखते भी सुना था मैंने 

मैंने तो सुना था यह हँसाते ही हैं , मगर यह तो जज़्बाती भी हैं 

मेरी समझ से तो बाहर हैं सारे 

अपनी तो सब कहते हैं, एक को फौजियों की आवाज़ बनते भी देखा है

एक फौजी का समय भी देखा है और अब उसी गुज़रे समय को याद करते 

अपने देश की खातिर अपाहिज होने का दर्द भी देखा है


माँ का प्यार, पिताजी की डाँट और दोस्तों के बगैर दुनिया की हर चीज़ को नहीं चाहिए कह कर मना करते भी देखा है 

मन के अंदर दबी उन ख्वाहिशों को भी आवाज़ लेते देखा है

शादी के बाद शरीर का साइज थोड़ा adjust होते भी देखा है

किसी की खुद की और उसकी तन्हाई की भी एक ही माप भी देखी है

एक पत्थर का सिरहाना भी देखा है 

विदेश की जगहों में सबको एक साथ घुमते और मौज लेते देखा है

इस इतवार को मैंने इंद्रधनुषी रंग बदलते देखा है


दूसरों की ख़ुशी में शामिल होते, दुखों में रोते , जन्मदिन के साथ हो हल्ला 
मचाते देखा है 

मैंने PACH को आज एक अलग रूप में देखा है 

Sattviko ने आज एक महफ़िल को अपने पूरे शबाब में देखा है 

मैंने देखा है...

PACH 22 : जश्न भी है और कवितायेँ भी PACH 22 :  जश्न भी है और कवितायेँ भी Reviewed by Shwetabh Mathur on 6:23:00 PM Rating: 5

3 comments:

  1. अइसा है गुरु, एकदम हे कमाल लिखे हो

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  2. Wow its great bro. Nd thanks for the mention. Hats off 2 ur memory.

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