Heroes: इंतज़ार ....

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The story behind this - Probably the toughest prose written by me on the defence forces and the first in Hindi. Leaving the usual aggression of a soldier and instead diving into the depths of human emotions, this is a tribute to the wives of every defence personnel. 



It salutes their courage and tries to bring out their fears which may seem to be common to the readers but it is different for every wife in its own little way as you read the thoughts of a newly married wife, a wife of every flying aviator in the forces( army/navy/air force), a wife of a POW ( prisoner of war) who doesn’t know that whether her husband is alive or not and finally a war widow.


This post salutes each and every one of them as they live their lives everyday like a brave woman but still harbours some fears which she doesn’t want them to come true. 
Its a wait…a long wait for them.

कुछ बातें बस यादें बन कर रह गयी हैं तुम्हारी गैर मौजूदगी में



वो बातें जो हौले से तुमने मुझसे कही थी


तुम्हारी गैर मौजूदगी जो हर रात तन्हा महसूस कराती है


घबराते हुए दिल से उम्मीद करती हूँ तुम्हारी सलामती की


तुम्हारे लौट आने के उस इंतज़ार का जो हर सुबह मेरे लिए उम्मीद की किरण लिए सूरज की तरह उगता है और शाम के ढ़लते सूरज की तरह ही अस्त भी होता है


माना फौजी हो तुम और एक अलग ही रिश्ता है तुम्हारा वतन से 
मगर मैं भी हिस्सा हूँ तुम्हारी  ज़िन्दगी का


साथ निभाने का वादा किया था तुम्हारा इस दिल ने, देखो अब भी वादा निभा रही हूँ मैं


बस फर्क वही है की उस वादे में अब तुम्हारी सलामती की दुआएं 
कुछ ज्यादा हैं हर दिन, हर पल


दुनिया मनाती है रोज़ नए त्यौहार , मेरे लिए तो रोज़ ही करवाचौथ है ... बाकी सब त्यौहार तुम्हारे बगैर सूने हैं


Jaswinder Kaur, widow of Lance Naik Nirmal Singh

तुम्हारे घर वालों ने बहू नहीं बेटी माना है मुझे, कहते हैं जब तू साथ है तो कमी महसूस नहीं होती अपने बेटे की

क्या मैं नहीं जानती की मेरी तरह उनका भी दिल कहीं न कहीं डरता होगा ?

फक्र है मुझे की मैं पत्नी हूँ एक फौजी की , इससे बड़ा सम्मान नहीं मिलता शायद

जब तुम घर आते हो तो लगता है जैसे बसंत छा गयी है, आवाज़ तुम्हारी नयी जान ले आती है

वो इंतज़ार मेरा ....

आवाज़ से तेज़ और मौत को पल पल चकमा देते हुए उड़ते हो तुम सरहद की हिफाज़त के लिए जान जोखिम में डालते हो तुम, अपने साथियों के लिए हमेशा तैयार रहते हो तुम

डर लगता है की कहीं तुम्हें कुछ हो न जाए

कभी यूँ ही कहा करती थी तुमसे की यह जहाज़ मेरी सौतन है , कहीं तुम्हें मुझसे छीन न ले

अब नहीं कहूँगी, बस तुम सही सलामत लौट आया करो

जब तुम पास नहीं होते तो ज़िन्दगी थम सी जाती है और दिल धड़कना बंद कर देता है

आसमान में उड़ते इस परिंदे के साथ मुझे अभी ज़िन्दगी में बहुत दूर तक उड़ना है

Widow of Kargill Martyrs

वो इंतज़ार मेरा ज़िन्दगी भर चले तुम्हारे लौट आने की राह में, हर रोज़

तुम्हारी सलामती की उस खबर का जो सालों से मेरे दरवाज़े पर नहीं आई मगर एक उम्मीद भी है जो साथ नहीं छोड़ती

देखने को तरस गयी हैं तुम्हें मेरी यह आँखें, गुज़रता है उम्मीद और निराशा के बीच हर एक दिन

बस लौट आओ तुम , और ज़िन्दगी से कोई ख्वाहिश नहीं मेरी 

बस वो इंतज़ार मेरा अब ज़िन्दगी भर का तुम्हारी यादों के साथ

ज़िन्दगी भर साथ निभाने का वादा करके यूँ अकेला छोड़ गए बीच सफ़र में

कोई मलाल नहीं मगर मुझे उस बात का, गर्व है एक शहीद की विधवा कहलाने का 

तुम्हारे जाने के बाद भी एक फौजी को कितनी इज्ज़त मिलती है यह अब पता चला

मगर मेरा सफ़र अभी चलेगा आगे , तुम्हारी यादों के सहारे ही

डरती थी की एक दिन ऐसा भी आएगा मगर आज मेरा फक्र , मेरे डर से कहीं ज्यादा है

वो इंतज़ार मेरा, शायद अगले जन्म तक जब तुम और मैं फिर मिलेंगे...
Capt Jayshree- wife of Major Vivek Gupta, saluting his remains.
Heroes: इंतज़ार .... Heroes: इंतज़ार .... Reviewed by Shwetabh Mathur on 2:12:00 PM Rating: 5

3 comments:

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