Memories

The places where moments reside

मेरी " परी "...



मेरी परी ...

वो छोटा सा खुशियों का पिटारा जो मेरी गोद में पहली बार आया

वो आँखें जिन्हें देख कर लगा की घर में ढेर सारी खुशियाँ आने वाली हैं

वो मेरी नन्ही परी....

वो नन्हे हाथ जिन्होंने पहली बार मेरी ऊँगली पकड़ी थी

वो नन्हे कदम जो पहली बार मेरी तरफ चल दिए थे, वो पहली बार उसका मुझको पापा बुलाना

वो घर की दीवारों का अपने आप ही drawing sheet बन जाना

वो आड़ी तिरछी लकीरों का इन्द्रधनुष बन जाना उन्ही दीवारों पे 

वो रंग भरते समय उनका खुद ही रंग जाना

वो सुबह हाथ पकड़ कर स्कूल जाना और छुट्टी पर गेट पर टकटकी लगाए राह देखना

वो त्योहारों पे उसका पूरे घर में उधम मचाना

मेरी नन्ही परी...

बड़ी होती मेरी परी, सहेलियों के साथ वक़्त बिताती , दुनिया में सब कुछ जानने वाली

अपनी माँ की लाडली , मुझे अब हर बात नहीं बताती , माँ को ही अपनी सहेली समझती है 

दिल रोने पे वो उसका कुछ न कहना, बस चुपचाप से उसका मेरे हाथ को तकिया बना , सीने से लग कर लेटे रहना

जज्बातों को शब्द नहीं मिल पाते हैं उसके, मगर उसकी ख़ामोशी उसका दिल बयान करती है

यह नटखट लड़की आज भी अपनी माँ की शिकायत करती है मुझसे 

मेरी नटखट, चुलबुली परी

अपने मन की बात अपनी माँ से कहलवाना 

वो उसका धीरे धीरे अपनी जिम्मेदारियां खुद निभाना

मेरी परी बड़ी हो गयी 

वो उसका अकेलापन महसूस होने पर बहाने से मुझे फ़ोन करके बात करना, आज भी कह नहीं पाती वो मगर महसूस करता हूँ की आज भी उसके दिल के कितना करीब हूँ

वो छुट्टियों में उसका घर मिलने आना और इशारों इशारों की चमक में उस लड़के का नाम बताने की कोशिश करना

वो मेरा उसको देखना और उसकी आँखों के डर का सब कुछ अपने आप बयान कर जाना 

मेरा हाँ कहना और उसकी ख़ुशी का “ You are the world`s best dad” बन के बाहर निकलना और झट से गले लग जाना 

आज अपनी परी को दुल्हन बनते देखना 

दो आग जल रही हैं एक मंडप के नीचे आज , एक के इर्द गिर्द रस्में निभायी जा रही हैं, एक जल रही है मेरे सीने में इसकी जुदाई की

विदा होते वक़्त उसके आंसूओं का सब कुछ कह जाना मुझसे , मेरी नन्ही परी आज किसी और की हो गयी

कुछ भी हो , वो हमेशा रहेगी – मेरी नन्ही " परी "


The story behind this- Written after passing through a wedding on a cold December night, it made me think that what must the father be thinking during the marriage procession and how this occasion would be both happy and sad for him. These lines trace the journey of a daughter through the eyes of her father who has given her all she wanted, raising her to the best of his ability which every father does. History also stands witness to the fact that although fathers may not be able to express their love the way they wanted but they love their daughters the most and they always remain their little “ angel”. Pari is an attempt to showcase that very love to the very special angel every dad has.



मेरी " परी "... मेरी " परी "... Reviewed by Shwetabh on 12:41:00 PM Rating: 5

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