Memories

The places where moments reside

कश्मीर में भाड़े के पत्थर अब नहीं चलते...



वो नोट क्या बंद हुए, कश्मीर में भाड़े के पत्थर अब नहीं चलते

अब प्रदर्शन की भीड़ नहीं दिखती, न नारे सुनाई देते हैं

अवाम तो बरगालाई जा सकती हैं वहाँ की, चलो खैर है अब कोई 8 
साल की बच्ची किसी राजनैतिक खेल का प्यादा तो नहीं फिलहाल

कम से कम न गोलियां चलेंगी अभी , न आँखें जायेंगी

जिन नोटों से चूल्हा जलता था वो तो खुद राख हुए हैं

जो दिया करते थे मुफ्त के नोट , वो तो खुद नोटों की गणित में लगे हैं

यहाँ अपने ऐशो आराम के लाले पड़ जाये, दूसरों के खाने कि चिंता क्यूँ करें ?

न किसी सैनिक पर ऊँगली उठ रही है अब, न उनके वहाँ होने का वजूद पूछा जा रहा है

नोटों से बनी सियासी चक्की रुक जो गयी है

किराए की भीड़ बेरोजगार बैठी है फिलहाल क्यूंकि...

नोट क्या बंद हुए, कश्मीर में भाड़े के पत्थर अब नहीं चलते

Few items from Waazwan.

अब स्कूल नहीं जलते , बस उनकी राख एक निशानी सी है

बौखलाए आतंकवादी और स्कूल न जाने का फरमान भी है

बच्चों के आगे बढ़ने की चाह तो देखो , इम्तहान में आगे रहने की होड़ भी है 

अवाम को भड़काने वाले नोटों के इंतज़ार में खाली बैठे हैं, कश्मीर धीरे धीरे बंद की जकड़न से बाहर आ रहा है 

नोट क्या बंद हुए, डल पे मायूसी छाई है

कश्मीर के स्वर्ग में सैलानी भगवान् की तरह होते हैं, अब भगवान् ही रूठ जाए तो कोई क्या करे ?

शिकारे पर्यटकों के इंतज़ार में यूँ ही खड़े हैं, चार चिनार के पेड़ों के नीचे अब कोई नहीं आता

काहवा भी यूँ ही लोगों के इंतज़ार में ठंडी हो जाया करती है , वाज़वान अपने कद्रदानों की राह देखता रहता है

बाज़ारों में अपने घर का चूल्हा जलाने की चिंता है, जिन नोटों से इन घरों का चूल्हा जलता था वो गुज़रे ज़माने की बात हो गए

नोट क्या बंद हुए, कश्मीर में काफी घरों में चूल्हे अब नहीं जलते...

The story behind this- This post is a hard reminder that demonetization has totally stopped stone pelting proving that they were being pushed by people with vested interests both within the country and outside. Locals do it for money. The other side of the same thing also tries to throw the light that how the whole state which thrives on tourism, is suffering as people are avoiding Kashmir due to cash crunch. “ Waazwan “ here in this context is used as being served in hotels and restaurants and waiting for takers. In the traditional sense, its a lavish 36 course meal prepared in weddings.
कश्मीर में भाड़े के पत्थर अब नहीं चलते... कश्मीर में भाड़े के पत्थर अब नहीं चलते... Reviewed by Shwetabh on 9:06:00 PM Rating: 5

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