Memories

The places where moments reside

अब नहीं दिखते वो...


Pickle in the sun

अब नहीं दिखते वो... 

अब नहीं दिखती वो कूलर में लगने वाली घास, की अब AC में रहने की ज़रुरत सी हो गयी है

अब नहीं दिखते वो तपती गर्मी में प्याऊ, की अब पानी की बोतलें खरीदने में ज्यादा सहूलियत है

अब नहीं दिखते वो आम पने के ठेले , की अब कोल्ड ड्रिंक थोड़ा ज्यादा लुभाती है

अब नहीं आता चटनी में वो स्वाद, कि मिक्सी के आगे वो सिलबट्टा कहीं छुप सा गया है 

अब नहीं दिखती छाँव देने वाली लकड़ी की वो चिक, की अब खिड़कियों पर blinds का ज़माना है

अब नहीं दिखते वो... 

अब दिखते नहीं गर्मी की रातों में छतों पे वो पलंग , की अब बिजली जाने पर हर घर में इन्वर्टर जो है

अब नहीं दिखती धूप में सूखती अचार की बरनी , कि अब बाज़ार से आया आचार समय बचाता है

अब नहीं दिखते वो छतों पे सूखते पापड़ , की अब उनकी देखभाल आसान नहीं

Bamboo chiks

अब नहीं दिखते घरों में वो शरबत के गिलास , कि अब तरावट भी गुज़रे ज़माने की चीज़ हो गयी है 

अब नहीं दिखती लोटे भर भर के ठंडाई , कि अब लोटे भर के चीज़ें पीना लोग भूल गए और ठंडाई के हिस्से रह गयी है बस होली के दिन भांग वाली याद.

अब नहीं दिखती वो फ्रिज में रखी घर में ही बनी आइसक्रीम, कि लोगों को अब ढेर सारे स्वाद जो चाहिए

अब नहीं गूंजती मोहल्लों में शाम के वक़्त को आइसक्रीम वाले की घंटी, कि अब बच्चों ने शाम को पार्को में आना जो छोड़ दिया है

अब नहीं दिखते वो... 

अब नहीं दिखते वो घूमते हुए गन्ने के रस के ठेले, कि अब लोगों को डब्बाबंद रस की आदत लग गयी है

अब नहीं दिखते वो छायादार पेड़, कि लोगों ने कभी तपती धूप में उन पत्तियों की ठंडी हवा कभी जानी ही नहीं

अब नहीं दिखते वो...

Squash

The story behind this - Seeing a person carry the khas grass for a cooler on his cycle one day, it made me realize that in the so called era of development quite a lot of things of the “ yesteryears summer era” have simply vanished. The most loss has been the various edible items in summers which cant be seen now that frequently, also missing are the green trees. This is a remembrance of all that we have lost in regard to summer. 
अब नहीं दिखते वो... अब नहीं दिखते वो... Reviewed by Shwetabh on 9:10:00 PM Rating: 5

1 comment:

  1. How true... it's a sad reality on the name of evolving. But I am.glad smaller cities & towns still have this charm. When I visit my native places - cooler ki ghas, chik, aam panna ka thela, sharbat ki taraash, sab vaise hi hai. Lovely poat

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