Memories

The places where moments reside

यूँ नाराज़ हूँ तुमसे ....




यूँ चुप न रहो, कुछ तो बात करो

यूँ खामोशियों की जंजीरें तोड़ के तीर तो चलाओ मुझपे

उलझन में है मन मेरा, आखें पढ़ने में नाकामयाब हो रहा हूँ तुम्हारी 

वो चाय की प्याली भी अजीब उलझन में है, मुझसे नाराज़ रहने का जरिया बना लिया है तुमने उसे

प्याली उठाती तो हो मगर होंठों तक लाती नहीं हो, यूँ ही आधे रस्ते उसे  बैरंग लिफाफे की तरह वापस रख देती हो

मेरा गुस्सा यूँ चाय पे क्यूँ उतार रही हो ? कहो तो कॉफ़ी बना दूँ ?

तुम्हारी आँखें, तुम्हारा काजल यूँ तुम्हारा गुस्सा बयान भी तो नहीं कर रहा. वजह तो बताओ मुझे.

हाथ पकडूँ तो झटक देती हो, न जाने किस बात से खफा हो ? 

चाय तो सिर्फ एक जरिया है तुमको बताने के लिए कि मैं नाराज़ हूँ तुमसे वरना पीनी तो मुझे तुम्हारी बनाई कॉफ़ी ही है

देख रही हूँ तुम्हारा मेरी आँखें पढ़ना और कुछ न पढ़ पाने पे अनकही झुंझलाहट

इन्ही आँखों और काजल पे मरते हो न तुम, खूब पता है मुझे

नाराज़ हूँ तुम्हारे देर से आने पे, बाहों में भर कर माफ़ी मांगने की जगह यह फूलों का गुलदस्ता ?

क्या यह फूल कह पायेंगे तुम्हारे वो लफ्ज़, वो जज़्बात कि आई एम सॉरी ?

नाराज़गी है जलन की, तुम्हारी उस साथी का तुमसे हँस हँस कर बात
करना

नाराज़ हूँ तुम्हारा अब मुझे देख कर बस “ अच्छी लग रही हो कहना” ,  अब तुम सीटी नहीं बजाते, बाहों में नहीं भरते

नाराज़ हूँ उस जलन से जब तुम कहते हो की मेरी बहन किसी दिन मुझसे ज्यादा खूबसूरत है

नाराज़गी है कुछ तुम्हारी मेरे से अब इजाज़त लेने की , मुझे पसंद है तुम्हारा यूँ ही मुझे चौकाते रहना

नाराज़ हूँ मैं तुम्हारे अब मेरे बनाये खाने में मीन मेख न निकालने से 

नाराज़ हूँ मैं तुमसे... तुम्हारे कुछ यूँ ही औरों की तरह बदल जाने से

नहीं चाहिए मुझे ज्यादा धन दौलत, और उसके लिए तुम्हारा यूँ ही जी तोड़  मेहनत करना

मुझे वही पहले वाले तुम चाहिए, तुम्हारा समय चाहिए, तुम्हारी बातें  चाहिए , मेरे डर में तुम्हारी बाहों का घेरा चाहिए, मेरी रोती हुई आँखों में  तुम्हारा मेरे पैरों के पास बैठ कर हाथ थामने का आसरा चाहिए, मुझे  तुम्हारी वही पहले वाली परी होने का वादा चाहिए..

मेरी उलझनों की भूलभुलैया को तुम्हारी दिशा का सहारा चाहिए..

मुझे बस तुम चाहिए..
यूँ नाराज़ हूँ तुमसे .... यूँ नाराज़ हूँ तुमसे .... Reviewed by Shwetabh on 10:58:00 PM Rating: 5

2 comments:

  1. Behind an angry women lies a confused man who have absolutely no idea. I like the last lines mujhe wo pehle wale tum.. Nice post

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