क्यूंकि हम सवाल नहीं करते ..




क्यूंकि हम सवाल नहीं करते ..

सड़कों के नाम पे पेड़ों को कटने देते हैं , फिर कहते हैं छाँव बाकी 

नहीं बची

कंक्रीट के जंगलों के लिए असली जंगले काट देते हैं , फिर कहते हैं 

सुबह चिड़िया नहीं चहचहाती

दहेज़ के लिए न जाने फट जाते हैं कितने ही सिलिंडर, पैसों के भूख

फिर भी कम नहीं होती

बेवजह अपना वोट यूँ ही दे आते हैं क्यूंकि प्रधान जी ने ऐसा कहा था , 

फिर उसी नेता को 5 साल तक देश को दीमक की तरह खोखला 

करते देखते हैं

जाने देते हैं महबूब को यूँ ही, दिल की बात जाने बगैर ही उसको 

रोकने की कोशिश नहीं करते

क्यूंकि हम सवाल नहीं करते ..

ऊल जलूल गानों को यूँ ही बढ़ावा देते हैं, फिर कहते हैं की जाने कहाँ 

गए वो दिन ?

खुद ही धरती से हरयाली खत्म कर देते हैं और फिर कहते हैं कि

 प्रलय का समय आ गया है

हादसों में लोग मर जाते हैं, शहर का जज्बा कह कर हम आगे बढ़ 

जाते हैं बस... फिर किसी हादसे की तलाश में

जैसा सदियों से चलता आ रहा है, चलने दो की “ परंपरा “ में फंस गए 

हैं हम

शुरू से ही जो सिखाया , सीख गए बिना सवाल किए , बाद में जब वो 

गलत लगा तो पूछ भी नहीं सकते क्यूँ ?

क्यूंकि हम सवाल नहीं करते ..

हर मंगल, शनिवार खाने का पंडाल लगा खाना बाँट देते हैं और पुण्य 

कमाने का कहते हैं , मगर महंगे होटलों में रोज़ न जाने कितना ही 

खाना बर्बाद होता है 

राजनीती के चक्रव्यूह में फँस जाते हैं, हम अपना गुस्सा सिर्फ धरना 

प्रदर्शन और मोमबत्तियां जला कर ही रह जाते हैं 

बीवी के मन की उलझन कब वक़्त की दूरी बन , उसे खफा कर देती 

है 

इश्क को खेल की बाज़ी की तरह खेलते हैं , जीतने की राह में न जाने 

कब दूसरे को हार जाते है

लड़की रिश्ते के नाम पे दहेज़ के दाम के स्टीकर के नीचे एक इंसान 

से बिक चुकी चीज़ बन जाती है

गलत के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले खत्म कर दिए जाते हैं बेखौफ 

यहाँ

अपनी ज़िन्दगी के कई हिस्से अनजाने दूसरों के हाथों दे देते हैं..

जो औरत माँ न बन सके , उसे समझने की बजाय ताने दे कर उसको 

दिल से पत्थर कर देते हैं

झूठी इज्ज़त बचाने के लिए इश्क की कब्रें खुद जाती हैं 

क्यूंकि हम सवाल नहीं करते ..


The story behind thisMany of things in our lives continue happening either because they are customs down the generations and either some are totally wrong and we don’t have the guts to question it all. This post touches abeit only a few topics and tells that they keep on happening just because we dont question these damn things. Its time to question them if we feel that they are not right instead of just following /doing them.













क्यूंकि हम सवाल नहीं करते .. क्यूंकि हम सवाल नहीं करते .. Reviewed by Shwetabh Mathur on 8:17:00 PM Rating: 5

5 comments:

  1. Bilkul sahi kaha aapne .....sirf swaal hi nhi krna .....Jo hum duniya me dekhna chahte hain uski shuruaaat bhi krni chahiye hume

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  2. Keval sawal nahi uthaye... sawalon ke jawab bhi ab humane dhundane chahiye Shwetabh!
    Profound pist!

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  3. I thought you write in Hindi only ! But the explanation you posted in English was an icing on the cake . Loved your post ! Chandigarh gal !

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  4. Hum sawaal karte hai,
    magar woh hamare astitatva ko hi sawaliya nishan laga dete hai.

    Aur hum apne hi gharo mein begaane ho jaate hai.

    Jab ghar hi hame itna mazloom kar dete hai, toh hum bahar kya khaaq sawal karenge?

    www.numerounity.com

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