Shwetabh
10:48:00 PM
कुछ अधूरा है तुम्हारे बगैर एक कमी है जो बयान नहीं होती कुछ खलता है जो पता नहीं क्या है? शायद तुम्हारी आदत पड़ती जा रही ...
तुम्हारे बगैर ज़िन्दगी बयान नहीं होती...
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