Shwetabh
12:14:00 PM
"कृपया दरवाजों से हट कर खड़े हों "... बीप...बीप...बीप... . और दरवाज़े बंद हों गये.. रोज़ की वही कहानी.. अब तो रट गया है ...
दिल की कलम से... ऐसी दोस्ती
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